How To Order

निर्देश :

आप हमारी website : www.rukminiprakashan.com पर वांछित पुस्तक add to cart करें और अपना ऑडर सुनिश्चित करें।
प्रत्येक पुस्तक का मुल्य पुस्तक पर अंकित मूल्य की राशि होगी।
डाक खर्च के रूप प्रत्येक ऑर्डर पर Rs. 75/- मात्र (डाक खर्च) भुगतान करना होगा।
यहां धनराशि भुगतान के दो विकल्प हैं—
(1) Online Payment  (throuth PAYUMONEY payment gateway
(2) Bank Transfer
 

विकल्प (2) Bank Transfer में आप वांछित पुस्तक पर अंकित मूल्य के धनराशि एवं Rs. 75 (डाक खर्च) के बराबर रूकमिणी प्रकाशन के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) बैंक खाते में जमा करें ।
Bank Account Details :
Account Name : Rukmini Prakashan
Account No. : 32688201389
Bank Name : State Bank of India
IFSC Code : SBIN0010354

बैंक खाते (Account) में धनराशि जमा करने के पश्चात् आप अपना Order No. एवं Bank Transaction ID हमें email या SMS करें ।
हमारे email id : rukminiprakashan@gmail.com, info@rukminiprakashan.com और मोबाईल नं.: 7079212121 पर भेंज कर अपनें ऑर्डर की पुष्टि करें।
हमारे द्वारा भेजी गई पुस्तकों के पहुँचने का नियत समय पोस्ट ऑफिस एवं कोरियर कंपनी पर निर्भर करेगा। रूकमिणी प्रकाशन केवल आपको भेजने का विवरण दे सकेगा । जैसे- पैकेट नंबर, भेजने की तिथि, कोरियर कंपनी का नाम एवं पोस्ट ऑफिस का नाम। कोरियर कंपनी या पोस्ट ऑफिस द्वारा हुए विलंब के लिए रूकमिणी प्रकाशन उत्तरदायी नहीं होगा।
धनराशि प्राप्त करने के दो—तीन दिन के भीतर आपके पते पर पुस्तक रजिस्टर्ड डाक अथवा कोरियर जो भी सुविधाजनक हो, भेज दी जाएगी ।
पुस्तकों की जानकारी के लिए आप 7079212121 पर संपर्क कर सकते हैं ।

About Us

About Us

On your way to success, we aim to be your companion guiding you through the hardships and helping you in achieving your goals. After a decade of successful journey, the brand Rukmini Prakashan is widely known as the leading force in the competitive books market. Rukmini Prakashan was established in the year 2012, under the leadership of its Founder Ravi Ranjan Kumar & Krishna Kumar Sah. We started publishing with a set of Class Room Study Material & Correspondence Study Package. That particular set of books was instantly accepted and became a hit amongst the students and the teachers, from then till now we have witnessed remarkable growth all through our unparalleled endeavors. more...

 

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